ग़ज़लों से, शेरो-सुख़न से, लफ़्ज़ों से मोहब्बत देखी है,
तुझसे जुदा होकर ही क़लम से इबादत देखी है।
तेरे बिना सुकून-ए-दिल हासिल कहीं न हो पाया,
हर धड़कन में बस तेरी ही कोई हक़ीक़त देखी है।
शब-ए-तन्हाई में तेरा ज़िक्र जब भी आया,
ख़्वाबों की रौशनी में अजीब सी शरारत देखी है।
ग़म की किताब खोली तो हर सफ़्हा तुझसे रौशन,
हर लफ़्ज़ में तेरी सूरत की नज़ाकत देखी है।
दिल के हर एक ज़ख़्म ने तुझको पुकारा ख़ामोशी से,
सबर की चादरों तले भी तेरी इनायत देखी है।
"कीर्ति" ने जब लिखा तेरा नाम दुआओं के सफ़्हों पर,
हर दर्द के पहलू में तुझसे करामत देखी है।
Kirti Kashyap "एक शायरा"✍️