तुजसे दिल लगा बैठे हे अपनी हद में हो जाऊ क्या,
बेहद सा हो गया हु में अब हद पार हो जाऊ क्या,
बुझा न पाऊं वो प्यास जो मेरे भीतर तरस रही हे,
उन प्यासे की प्यास बुझा के खुद तरस जाऊ क्या,
मुझसे दूर होके भी आंखों से ओझल नहीं होते तुम,
याद आती हे तुम्हारी अब उन यादों में खो जाऊ क्या,
दिन रात देखता रहूं तुझे ऐसे अरमान सजाऊं क्या,
वो अरमान भी कही बह गए कैसे सुकून दे जाऊ क्या,
अब तो एक ही तमन्ना हे दिल में वो भी पूरी कर लू क्या,
घना कोहरा छोड़ गए दिल में अब सुकून से मर जाऊ क्या.
ले. नीरव लहेरु (गर्भित)
ता. २८/०८/२०२५
- Nirav Laheru