🌺 Poem: Maharo Rajasthan
रेत की चुनरी ओढ़े, सूरज संग मुस्काए,
थार की धरती पर हर मोती दीपक जलाए।
किलों की दीवारों में इतिहास गाता है,
माटी की खुशबू में सारा जग समाता है।
केसरिया बाना, पगड़ी में मान,
लोक-गीतों में बसता है पूरा राजस्थान।
ऊँट की चाल, ढोलक की थाप,
रंग-बिरंगे मेले, पग-पग पर आप।
गवराई झूमे, मोर नाचे रे,
मेरे राजस्थान की शान सदा गाए रे।
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