मैने आज श्मशान में देहसंस्कार देखा ,
उसके अधजला शरीर से धुआं में से , उसका अभिमान देखा ।
चंद लकड़ियों में जल गया वो सब , जो तमाम उम्र वो बनाता रहा ,
शायद ये अपनो से रूठा भी होगा ,
किसी का हक भी खाया ही होगा ,
अपने अभिमान से किसी को दबाया भी होगा ,
क्या काम आया वो सब , मैने आज श्मशान में देहसंस्कार देखा ।