"रूदाद-ए-हयात"
लोग समझते है मुझको नादान यारों,
पर है मुझे लोगो की पहचान यारों।
तिश्नगी, तरक्की, तन्हाई, तज़ुर्बा, यही है,
ज़िन्दगी में फूलों का गुलदान यारों।
एक बूँद बारिश के लिए तरसती निगाहें,
मन है मुद्दतो से प्यासा रेगिस्तान यारों।
नींद, ख़्वाब, उम्मीदें, हसरते सुकून की,
बहुत मुख़्तसर से है मेरे अरमान यारों।
सुर्ख आँखें है मगर लबों पर हंसी,
इतना भी नहीं है ये काम आसान यारों।
रुदन ख़ार-ख़ार दर्द-ए-सदा सुने कौन,
दिल में उमड़ता सा है एक तूफान यारों।
मासूम से दिल को रुस्वाई, मलामत मिली,
अब क्या बताऊं मेरा नफा-नुकसान यारों।
इन चंद हर्फ़ों में छिपा है रूदाद-ए-हयात,
"कीर्ति" इतनी भी नहीं तुमसे अंजान यारों।
Kirti Kashyap "एक शायरा"✍️
तिश्नगी = प्यास, लालसा, तड़प
मुख़्तसर = छोटे, सूक्ष्म
रुदन = रोना विलाप
ख़ार = क्षार, फाँस, कंटक, कांटा, खारा
सदा = पुकार, चीख, आवाज
रुस्वाई = बदनामी
मलामत = निंदा, तिरस्कार
हर्फ़ = अक्षर
रूदाद-ए-हयात = ज़िन्दगी की कहानी