रोटी--
रोटी क्या-क्या नाच नचाती,
रोटी क्या-क्या हालात बनाती,
रोटी के लिए मरता जीता इंसान, रोटी की खातिर बनते विगड़ते हालात।!
रोटी खून पसीने की मोहताज, रोटी पल-पल की सांसे धड़कन प्राण, रोटी रहमत करम आशीर्वाद।!
रोटी के लिए क्या-क्या बनता इंसान, जुआरी भिखारी मदारी का धर्म ईमान,रोटी मजबूर का हक, रोटी मजलूम की जिंदगी बुनियाद।!
रोटी है तो जिंदा रहता ईमान, रोटी नहीं तो वहशी दरिंदा चोर डाकू बन जाता है इंसान,रोटी की खातिर किसी का लहू भी पी जाता इंसान।!
रोटी राजनीति, रोटी धन दौलत की ढाल,भूख इंसान की एक रोटी की मोहताज, रोटी जाने क्या-क्या कर जाती, रोटी ही तकदीर की शान।!
जाने घाट-घाट ले जाती, मातृभूमि जन्मभूमि छुड़वाती, दर-दर भटकाती,शायद समझ नहीं पाता एक रोटी की कीमत इंसान।!
नन्दलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उत्तर प्रदेश!!