भक्तों की सरकार माँ के दरबार, बोलो जय माता की।
ऊंच-नीच का भेद नहीं, सब माँ की संतान है, बोलो जय माता की।
माँ को भक्तों से दरकार नहीं, और कोई सरोकार नहीं, बोलो जय माता की।
नहीं चाहिए रुपया पैसा, कीमती उपहार, केवल भक्तों की जयकार, बोलो जय माता की।
माँ को चाहिए भावों के भक्तों का सत्कार, बोलो जय माता की।
माँ भरती सबकी झोली, कोई जाता नहीं खाली, माँ का सारा जग संतान है, बोलो जय माता की।
दुखियों का सहारा माँ के दरबार, न कोई हारा, माँ ही जीवन आधार, बोलो जय माता की।
माँ की महिमा जो निशदिन गावे, माँ बेड़ा पार लगावे, माँ कर्म धर्म संसार, बोलो जय माता की।
माँ के हैं रूप अनेक, वात्सल्य व्यवहार, बोलो जय माता की।
अपराध क्षमा करती, अवसर देती बार-बार, बोलो जय माता की।
दुष्ट दानव कर जाए जब हद पार, माँ रूप विकट काल विकराल, बोलो जय माता की।
माँ अष्टभुजी, माँ हंसवाहीनी, माँ शेर पर सवार, बोलो जय माता की।
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर।