मेरा संघर्ष---
मेरा संघर्ष करने दो बस मुझे, मेरा संघर्ष करने दो।
युग दृष्टि दिशा बदलने कि खातिर, जीवन पथ पर बढ़ने दो।
संदेह भय भ्रम अंधकार, उबड़-खाबड़ असमंजस बहुत है।
कठिन बहुत है जीवन पथ, आशा और निराशा का कुरुक्षेत्र रण भूमि है जीवन पथ।
कलयुग है कहते हैं, कर्म युग है एक दूजे से आगे बढ़ने कि दौड़ दौर होड़ में।
रिश्ते नाते संबंधों का बलिदान त्याग है पथ जीवन, मनव एक दूजे का प्रतियोगी प्रतिस्पर्धी।
चाहे रिश्ता कोई हो, दुरूह डरावनी दक्षता योग्यता उत्कर्ष परीक्षा पथ जीवन।
भाई बहन मित्र पड़ोसी एक दूजे से आगे बढ़ने कि दौड़ दौर है आपा धापी।
स्वस्थ्य स्वच्छ नहीं प्रतिस्पर्धा प्रतियोगिता नहीं कलयुग पथ जीवन।
एक दूजे से आगे निकल जाने कि होड़ दौड़ पता नहीं खींचेगा डांग कब कौन?
घायल हो अवनी पर पश्चाताप करू, आंसू बहाऊ अब मेरा संघर्ष करूंगा।
कलयुग युग कि धारा संग बहुगा, देखें मेरा पथ रोकेगा कौन?
जीवन के कुरुक्षेत्र में सभी धुरंधर रथी महारथी ज्ञानी ध्यानी शस्त्र शास्त्र परिपक्व मौन।
एक दूजे के शव सीढ़ी से आगे बढ़ने का काल समय दौर जीवन पथ।
शाम दाम दंड भेद अस्त्र शस्त्र कभी धारदार कभी बेमतलब बेकार।
जीवन के कुरुक्षेत्र में अब मेरा संघर्ष जीवन रण का मतलब बदलेगा।
बस मुझे मेरा संघर्ष करने दो, बदल सकूं युग के रीती रिवाज मतलब मस्ती हस्ती हद तोड़ दूं।
मेरा संघर्ष चिंगारी ज्वाला पल प्रहर नित्य विकृत विरासत परम्परा का अंत कर दूं।
मुझे मेरे संघर्ष के पथ जीवन रहने दो, संघर्ष शक्ति है संघर्ष सत्य है।
संघर्ष शस्त्र है संघर्ष शास्त्र है, संघर्ष से तपता मानव संघर्ष से मानव सुगंध।
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उत्तर प्रदेश।