मुझे लोगों को कुछ करके दिखाना ना होता…
मुझे लोगों को कुछ करके दिखाना ना होता,
तो फिर शायद मैं भी खुश होता।
हर सुबह किसी को दिखाने के लिए उठता हूं,
अगर बस खुद के लिए जागता — तो मैं खुश होता।
अपने सपनों को भी दूसरों की नज़रों से देखता हूं,
जो दिल से चाहता हूं, वो निभाना ना होता — तो मैं खुश होता।
कभी घर वालों की नज़र, कभी समाज की ज़ुबान,
हर दिशा में खुद को घसीटना ना होता — तो मैं खुश होता।
हर काम में साबित करना पड़ता है 'मैं काबिल हूं',
अगर बस जीने भर से चलता — तो मैं खुश होता।
भीड़ में अपनी जगह बनानी है हर रोज़,
अगर अपनी जगह को खोना ना पड़ता — तो मैं खुश होता।
हर दिन एक नया मुखौटा पहनता हूं मैं,
अगर असली चेहरा छुपाना ना होता — तो मैं खुश होता।
मैं भी मुस्कराना चाहता हूं बेफिक्र होकर,
अगर हँसी को जज़्बातों से मिलाना ना होता — तो मैं खुश होता।
ज़िंदगी को जंग समझ लिया है हमने,
काश ये बस एक सफर होता — तो मैं खुश होता।