॥ संदेह ॥
सच है मित्र... संदेह जब जन्म
लेता है,
तो रिश्तों की नींव हिल जाती है
मन खुद से भी डरने लगता है
और प्रेम... प्रश्न बन जाता है।
"विश्वास रखो तो जीवन फूल है,
और संदेह रखो तो शूल है।
जो शक में प्रेम को तौलते हैं,
वो हाथों से खुद को ही खोते हैं।"
शंका कोई रोग नहीं,
जो दवा से मिट जाए।
यह तो एक जहर है,
जो आत्मा तक समा जाए।
शक से पहले एक बार पूछ लिया करो,
रिश्तों को थोड़ी मोहलत दिया करो।
हर बात में कसौटी ठीक नहीं होती,
प्यार में थोड़ा विश्वास भी जिया करो।
संदेह दिल में जो आ जाता है,
हर अपना भी पराया नज़र आता है।
बिना कहे ही सब कुछ बदल जाता है,
प्यार ज़िंदा रहते हुए भी मर जाता है।