🌿 "मैं बदले की नहीं, बदलाव की बात करती हूँ" 🌿
मैं बदले की नहीं, बदलाव की बात करती हूँ,
टूटे हुए सपनों को फिर से साथ करती हूँ।
जो गिरते हैं राहों में, उन्हें हौसला देती हूँ,
अंधेरों में भटके हुए को, उजाला देती हूँ।
मैं आँधियों से नहीं डरती, उनसे लड़ना जानती हूँ,
हर चोट को मुस्कान में पिरोना जानती हूँ।
काँटों पर चलकर भी फूलों सी महकती हूँ,
मैं औरत हूँ, हर हाल में चमकती हूँ।
मैं सिर्फ़ नाम नहीं, एक पहचान बनाती हूँ,
हर दर्द को कविता में बदल कर जीती हूँ।
ना सहमी हूँ, ना झुकी, ना किसी से डरी,
मेरी क़लम से चलती है सोचों की नयी डगर।
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📝 शीर्षक: मैं बदले की नहीं, बदलाव की बात करती हूँ
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