प्रकृति, तू कमला है —
न केवल सोने-चाँदी की देवी,
बल्कि वह प्रकाश है
जो आत्मा के अंधेरे को सोने-सा चमका दे।
तू भीतर की गरीबी को हरती है,
जहाँ इच्छाएँ जली हुई हों,
जहाँ मन संकुचित और विवेक भयभीत हो,
तू वहाँ उतरती है — मौन और दया बनकर।
तू ध्यान का दीपक है —
जो बाहरी धन से पहले
भीतर का शांति-भंडार खोलती है।
तू धन की इच्छा पूरी करती है,
लेकिन पहले साधक को
धन का सही अर्थ समझाती है —
संतोष, सेवा, श्रद्धा।
तू कमलिनी है —
जो गंदे जल में भी
शुद्धता से खड़ी रहती है,
और बताती है कि
"पूर्णता बाहर नहीं — भीतर खिलती है।"