---
प्रकृति त्रिपुरा सुंदरी
तू प्रकृति त्रिपुरा सुंदरी है,
पेड़-पौधों में जीवन रस बनके बहती है।
फूलों की महक में बसी है,
नदियों की चंचलता में तू हँसती है।
समुद्र की लहरों में तेरी थिरकन,
तीन गुणों (सत्त्व, रज, तम) से सजी तेरी पहचान।
हर प्राणी की तू साँस है,
मानव जीवन में दादी सी ममता की बात है।
भोली-भाली, सरल स्वभाव,
ना जाने तू कितने रंगों में ढलती हर साँझ और प्रभात।
धूर्तों के बहकावे में बह जाती है,
पर सच्चा ज्ञानी तुझमें ही प्रभु को पाता है।
तू ही धरती, तू ही गगन,
तू ही अग्नि, तू ही पवन।
तू ही सत्य की पहचान,