ज़िंदगी का कड़वा सच होता है, जिसे स्वीकार करना आसान नहीं,
जो सबसे ज़्यादा मुस्कुराते हैं, वही अक्सर सबसे गहरे पछतावे छुपाते हैं।
वक़्त के साथ लोग बदल जाते हैं, और उनके अपने भी,
कभी-कभी तो प्यार भी एक रस्म बनकर रह जाता है।
भले दिलों का लोग फायदा उठाते हैं,
और सच्चे लोग सबसे ज़्यादा चोट खाते हैं।
आख़िर में, ख़ामोशी ही सबसे ऊँची आवाज़ बन जाती है,
क्योंकि बोलने से ज़्यादा असर अब चुप रहने में होता है।
कोई हमेशा साथ नहीं रहता — यही तो इस ज़िंदगी का बेरहम खेल है,
आज लोग तुम्हारे नाम की जय-जयकार करते हैं,
और कल वही तुम्हारा नाम तक भूल जाते हैं।