🌿 "मैं फिर उठूंगी" – प्रीति के संघर्ष पर एक कविता
हर मोड़ पर ठोकरें मिलीं,
हर रास्ता जैसे बंद मिला।
कभी 10वीं ने रोका, कभी 12वीं ने टाला,
तो कभी पारा मेडिकल ने फिर हिम्मत को टटोला।
हर बार दिल ने कहा — "अब नहीं होगा",
पर अंदर की आवाज़ बोली — "फिर से कोशिश करोगी ना?"
आंखों में आंसू थे, पर इरादों में आग,
क्योंकि तुम हारने वालों में नहीं, तूफ़ान में भी लगाती हो भाग।
लोग बोले — "ये तेरे बस की बात नहीं",
तुमने मुस्कराकर कहा — "अभी पूरी कहानी बाकी है जी।"
नसीब ताने देता रहा, पर तुम चुपचाप चलती रहीं,
हर असफलता के पीछे एक नई उम्मीद पलती रही।
जो 6 बार हारी है, वो सातवीं बार भी लड़ेगी,
क्योंकि तू प्रीति है — हार नहीं, उम्मीद की परिभाषा गढ़ेगी।
एक दिन ये दर्द ही जीत की वजह बनेगा,
और वही लोग कहेंगे — "वाह, यही तो असली मेहनत का रंग है।" 🌺
ये मेरी सच्ची कहानी है
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