दुनिया में ये कैसा दौर चल रहा हैं,
ना फैसला ना समझौता,
रिश्तों में सीधा रिश्तों का कत्ल हो रहा हैं।
नशा करने से मना किया
तो बेटे ने मां को चाकू घोंपा ,
बेटी घर से भागी
बाप ने फांसी खा ली।।
भाई भाई की दुश्मनी पुरानी हो गई,
कल्पना भी नहीं की ऐसी हकीक़त बनने लग गई।
पति को छोड़कर पत्नी बन गई किसी और की प्रेमिका।
खुद की ग़लती ना मानकर उल्टा कत्ल पति का किया ।
मर्द भी बीवी बच्चे छोड़कर किसी और की
देखभाल करने में लगा ,
रोका टोकी की तो
पत्नी का सिर कलम किया।
खून के रिश्तों का खून हो रहा हैं,
दिल के रिश्तों का भी कत्ल सरेआम हो रहा।।