“सच बोलते बोलते, लब थक से गए हैं,
झूठी दुनिया के नकाब, हर दिल पे लगे हैं।
सच की राह में, कांटों से भरे हैं रास्ते,
हर एक कदम पे, छल के मिले हैं वास्ते।
दिल ने हर बार, सच का दिया साथ,
मगर दुनिया ने समझा, इसे एक गलत बात।
सच बोलते बोलते, जख्म गहरे हो गए हैं,
दुनिया के इस खेल में, हम अकेले रह गए हैं।”