मैं लिखती हूं
मैं लिखती हूं वो ख्वाब
जो कभी देखे नहीं गए
मैं लिखती हूं वो लफ्ज़
जो कभी बयां न किए गए
मैं लिखती हूं वो
वो सांसे
जो आखिरी थी
मैं लिखती हूं वो जज्बात जो दफन कर दिए गए
मैं लिखती हूं वो मकान
जो कभी घर न बन सका
मैं लिखती हूं आंसुओं की वो बूंदे
जो आंखों में रह गई
मैं लिखती हूं वो डांट
जो बचपन को निगल गई
मैं लिखती हूं वो कुरीतियां
जो मानवता को लील गई
मैं लिखती हूं वो प्रेम
जो बस सिमट गया मां के आंचल तक
मैं लिखती हूं वो विचार
जो अंतिम क्षणों के ठीक पहले उठते है
मैं लिखती हूं वो दास्ता जो हजारों सालों से सुनी गई है पर कभी समझी न गई
मैं लिखती हूं वो इतिहास
जो दोहराया जाता है हर बार
मैं लिखती हूं वो फलसफा जो कैद रह गया किसी साधारण मस्तिष्क में
और मैं लिखती हूं वो सारा बोझ
जो रह गया बस मेरे मन तक
ArUu ✍️