रोपणात् पालनात् सेकाद्ध्यानस्पस्पर्शनकीर्तनात् ।
तुलसी दहते पापं नृणां जन्मार्जितं आग ।।
हे खग ! तुलसी का पौधा रोपने से,उनकी मावजत करने से,जल सिंचने से, उनका ध्यान, स्पर्श एवं गुनगान करने से मनुष्य के पूर्व जन्मों का संचित पाप जलकर भस्म हो जाते हैं ।🙏🙏🙏