प्रकृति का प्यार
हरी-भरी ये वादियाँ, पेड़ों की छांव,
नदियों का संगम, ये बहती हवाओं का गान।
सूरज की किरणें जब धरती को छूती हैं,
प्रकृति की बाहें जैसे हमें समेटती हैं।
पंछियों का मधुर गीत, फूलों की खुशबू,
झरनों की लय, और बारिश की बूंदें।
सागर की लहरें जब तट को चूमती हैं,
प्रकृति का हर रूप हमें अपना बनाती है।
आकाश का विस्तार, तारे झिलमिलाते,
चाँदनी रातें हमें सपने दिखाते।
हर मौसम का अपना एक अनमोल एहसास,
प्रकृति सिखाती है जीवन का हर खास।
धरती की गोद में है स्नेह अनंत,
हमसे कहती है, "करो मुझसे संबंध।"
संभालो मुझे, मेरा आदर करो,
मैं तुम्हारी माँ हूँ, मुझे न ठुकराओ।
प्रकृति का प्रेम है असीम और अनमोल,
इसकी सुंदरता के आगे फीके हैं सब मोल।
चलो हम सब इसे सहेजने की कसम खाएँ,
प्रकृति का साथ देकर इसे और महकाएँ।