बेपर्दा हुई है मुहब्बत
अरसे बाद आज बेपर्दा हुई है मुहब्बत,
उसे जब मैंने गैर के ख़्यालों में देखा।
धड़कते दिल ने चाहा था उसका साथ हमेशा,
मगर हर बार उसे सवालों में देखा।
वो जो वादा था मेरे नाम की सुबहों का,
अब उसी वादे को ही जंजालों में देखा।
चाहत की हवा बहती रही हर रोज़ मगर,
इश्क़ को हमने टूटे ख़यालों में देखा।
फासले बढ़े तो रिश्ते भी अजनबी से लगे,
किसी अपने को आज हवाओं में देखा।
वो चेहरा जो कभी था मेरी पहचान सा,
आज उसे मैंने बेगानों के हालों में देखा l