उपकार
आए हो जग में तो
उपकार करके जाओ,
नश्वर है ये काया
कुछ नाम करके जाओ।
रग रग में बह रहा है
स्वार्थ का जो शातिर,
तिलाजजि दो उसे तुम
परमार्थ की खातिर ।
औरों को सुख देकर बंधु
स्वयं भी सुख पाओगे,
मिट जाएगा अंधेरा जीवन से
भविष्य उज्ज्वल कर जाओगे।
जीना है नाम इसी का
किसी के काम आ जाओ.
छोड गठरी पाप की
भवसागर से तर जाओ।
आए हो जग में तो
उपकार करके जाओ.
नश्वर है ये काया
कुछ नाम करके जाओ।
- किशोर शर्मा 'सारस्वत