*अच्युत,अलंकृत,सूर्यसुता,गोरक्षक, जन्माष्टमी**
*अच्युत* प्रभु परमात्मा, सबका पालन हार।
जगत नियंता है वही, यह वेदों का सार।।
अलंकार से *अलंकृत*, करें यशश्वी गान।
गुणवर्धन यश अर्चना, मिले सदा सम्मान।।
*सूर्यसुता* में गंदगी, नाग-कालिया दाह।
उगल रही है झाग फिर, नहीं सूझती राह।।
द्वापरयुग में कृष्ण जी, *गोरक्षक* बलराम।
गोवर्द्धन संकल्प ले, किए विविध हैं काम।।
भाद्रमाह *जन्माष्टमी*, मुरलीधर घनश्याम।
दुख को हरने अवतरित, जय पावन ब्रज-धाम।।
मनोज कुमार शुक्ल *मनोज*