सुनो शायद मै अब लौट के नहीं आऊंगा....
और अगर आया भी तो एक केसरी रंग का कफ़न अपने साथ लाऊंगा....
पर देखो तुम रोना मत और मेरे ऊपर जो गर्व है तुम्हें उसको खोना मत....
और सुनो मां से कहना की अब वो दरवाजे पे खड़े होकर मेरा इंतजार ना करे....
और मां होकर मुझे मां के लिए शहीद होने से इंकार ना करे....
मैंने गली मोहल्ले में काफ़ी वक़्त गुज़ारा है...
पर सुनो उनके लिए अब मेरा कफ़न ही एक आख़िरी सहारा है....
कहने को तो मुझ पे पहला हक तुम्हारा है पर माफ़ करना....
एक फौजी को अंत मै सिर्फ उसका वतन प्यारा है....
तुम अपने माथे से सिंदूर को मत हटाना....
क्योंकि मै मरा नहीं सिर्फ शहीद हुआ हूँ....
तुम्हारे दिल में अभी भी जिंदा हूँ माफ़ करना....
तुम्हें मैंने एक किस्सा नहीं बताया था...
जब मैं 14 साल का था तभी से मैने देश की मिट्टी से इश्क़ जताया था......
तुम फिक्र मत करना मै तुम्हारे साथ हूँ.....
उस तिरंगे को देखना जब मै मै याद आऊं.....
क्योंकि मै उसमे अभी भी आबाद हूँ मै....
मिट्टी की कीमत जानता हूँ इसीलिए तुम्हारे अलावा उसे भी जान मानता हूँ!
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