मैं और मेरे अह्सास
ज़िंदगी की अमूल्य इनायत है दोस्ती l
रसीली नटखट शरारत है दोस्ती ll
निस्वार्थ प्यार का झरना बहेता l
दो रूहों की अमानत है दोस्ती ll
एक बार लग जाए तो छूटती नहीं है l
जाम सी नशीली आदत है दोस्ती ll
हसीं के पीछे का दर्द पहचान ले l
धड़कनों की हिफाज़त है दोस्ती ll
सखी
दर्शिता बाबूभाई शाह