पुस्तक समीक्षा- 04.07.24 ( सारांश )
समीक्ष्य कृति : बड़ी माँ
लेखक : किशोर शर्मा 'सारस्वत'
विधा : उपन्यास
पाठकों का ध्यान बरबस अपनी ओर आकृष्ट करती श्रेयस्कर औपन्यासिक कृति : बड़ी माँ
इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स सम्मान से विभूषित सुप्रतिष्ठित साहित्यकार किशोर शर्मा 'सारस्वत' का उपन्यास 'बड़ी माँ। इसकी कथावस्तु बारह भागों में विभाजित है।
संवादों के साथ लेखकीय टिप्पणी की संवेदनापरक आलंकारिक भाषा व अनुभवगम्य विश्लेषण कृति की अर्थवत्ता में चार चाँद लगाने में अत्यंत सहायक हैं और मुहावरों के स्वाभाविक प्रयोग ने अभिव्यक्ति कौशल की पारदर्शिता में इज़ाफ़ा किया है।
कृति के आद्योपांत अनुशीलन के उपरांत यह भी निर्विवाद रूप से कहा जा सकता है कि व्यक्ति अपने प्रारब्ध कर्मो का भोग भोगने के लिए संसार में आता है, और उसी के अनुरूप उसे स्थितियों व परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है,वह सुख व दुःख का भोग करता है तथा अपने नवीन सत्कर्मों व निष्काम सेवा भाव से जीवन को उत्कर्ष की ओर भी ले जा सकता है। कृति के अंतर्गत आए पात्रों की चरित्रगत विशिष्टताओं से इसे भलीभाँति समझा जा सकता है।
उपन्यास का नामकरण 'बड़ी माँ' सर्वथा सार्थक एवं समीचीन है क्योंकि कृति में आए समस्त घटनाक्रम के केंद्र में बड़ी माँ की अहम भूमिका है। यह औपन्यासिक कृति अपने मूल प्रतिपाद्य,प्रयोजन,उद्देश्य एवं सन्देश की दृष्टि से भी सफल है।शानदार सृजन के लिए लेखक को हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं।
डॉ. ज्ञानप्रकाश 'पीयूष' ,आर.ई.एस.
पूर्व प्रिंसिपल,
साहित्यकार एवं समालोचक
संपर्क--094145-37902, 070155-43276
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