कुछ क्षण थे
कुछ क्षण थे
जो देवता जैसे थे,
कुछ क्षण थे
जो मनुष्य जैसे थे,
कुछ क्षण थे
जो नदी जैसे थे,
कुछ क्षण थे
जो पहाड़ जैसे थे,
कुछ क्षण थे
जो झील जैसे थे,
कुछ क्षण थे
जो पगडण्डी जैसे थे,
कुछ क्षण थे
जो वृक्ष जैसे थे,
कुछ क्षण थे
जो आसमान समान थे,
कुछ क्षण थे
जो फूल जैसे थे,
कुछ क्षण थे
जो दिव्य अवतार थे,
कुछ क्षण थे
जो प्यार जैसे थे,
कुछ क्षण थे
जो ईश्वर तुल्य थे ।
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*** महेश रौतेला
३१.०७.२०१३