नाला-ओ-फ़रयाद को शानाव्साँन करना
ग़म-ए-हिज्र बेंइतन्हा व्हा गुमान करना
--
अश्क-ओ-आतिश में रूकन-ए-परिज़ाद है
बला-ए-शब-ए-फ़ुरक़त में अरमान करना
--
बसाह पतझड़ की आहों से नुमायां करना
निगाह-ए-शब-ए-गम कोई चराग़ान करना
--
वादे तेरे मेरेमें याद-ए-रुसवा जब भी करना
शब-ए-तनहाई मिलबाहे फंला दामन करना
--
जलवा-ए-ज़ात-ए-यार को मेरे रूबरू करना
इश्क-ओ-मस्ती या नारा नया जहान करना
--
ख़याल-ए-दिल में है ष्बयाद-ए-हफ़्त-गुरबत
इश्क-ए-हकीकी राज़ हर आसमान करना
--
रंज-ओ-आलम-ए-सुरूर दाम का असर लाना
ज़ख्म-ए-दिल को भी गुलां का दरज़ा करना
--
रातांको रोशनी दिया ए चांद तारूफ करना
इश्क-ओ-ग़म के बज्म में महमांन करना
--
हर सांस में है तेरी याद का चिराग गर बस
हर मंजिल में तुझसे यही षिकायत करना
--
शाम-ए-गम में भी जश्न का फुरर्कत करना
हर अश्क को मुस्कुराहट बस जबान करना
--
सेहरा-ए-गम में भी फूलों की बहारें देख्ता रहा
हर दर्द को तसल्लीब्ख्स जब दरम्यान करना
--
बेकरारी, मसलन कुंन्तो बस गम का सफर
हर लम्हा-ए-गम को रूह की दास्तान करना.
--
ख्याल-ए-रूक-बेजा-खम़ बस एकबान नशा
हर नशे को खुशनुमाया तो इत्मीनान करना.
-- --
---
सप्रेम-स्वरचित मनोरजंन मनोरथपूर्ण भाव सहित
अकथ बस, नेपथ्य में बहुत कुछ सामाजिक,आर्थिक और राजनैतिक परिदृश्य के मांनिद अपने आप मन के भाव को जोडे-समस्या को कसौटी पर परखे, केवल चितंन योग्य, मय आंनन्द
© जुगल किशोर शर्मा-बीकानेर-9414416705