The Download Link has been successfully sent to your Mobile Number. Please Download the App.
Continue log in with
By clicking Log In, you agree to Matrubharti "Terms of Use" and "Privacy Policy"
Verification
Download App
Get a link to download app
सोपान --------- प्रथम सोपान पर मंजिल है खड़ी सफलता की कुंजी उसी से जुड़ी कदम जो उस पर रखा ही नहीं जीवन जीने की राहें न जान पड़ी। हर राह दिखाती एक नया सोपान कहाँ है जीवन का वह मधुर गान मन का सागर तो गहरा है बहुत जीवन नैया को पार करना है तूफान। भ्रम-संशय आकर तो आँखें दिखाता तरह-तरह से सदा सबको है लुभाता भूल- भुलैया की नगरी में चक्कर काटे भक्ति का सोपान मगर सबको जगाता । आभा दवे मुंबई
आज के नवभारत प्लस मेें मेरी रचना को प्रकाशित करने के लिए नवभारत टीम का हार्दिक धन्यवाद 🙏🏻 20-7-2026 सोमवार
https://youtu.be/NmOBCMj_usE?si=E5tWaCNljRokE35y
https://youtube.com/shorts/L5dHQDk2kYc?si=zdyoHpXOpFiqlSyV
विश्व पर्यावरण दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ🙏💐💐 पर्यावरण ---------------- हरा भरा सुंदर संसार धरा की हरियाली का प्यार नन्हे पौधे पेड़ बन कर कर रहे धरा का श्रृंगार। हवा भी हरियाली में मुस्कुराती है पर्यावरण को शीतल कर जाती है प्रदूषण रहित हवा अपना महत्व बता सब को जीने का संदेश दे जाती है। पर्यावरण को रखना होगा साफ प्रकृति के साथ करना होगा इंसाफ चलना होगा कदम से कदम मिलाकर हाथ कुदरत ना हो फिर अपने खिलाफ। पंछी पेड़ों पर चहचहाते हैं हम सबके जीवन को सुंदर बनाते हैं पेड़ लगाओ पेड़ बचाओ हमको यह सिखलाते हैं । आभा दवे मुंबई हाइकु -पर्यावरण पर ----------- 1)हरित धरा चीख के कह रही न काटो पेड़ । 2)हरियाली है जीवन की उमंग पेड़ बचाओ । 3)पवन चले झूमते पेड़-पौधे खुश होकर । 4)पर्यावरण हरित जीवन से महके सदा । 5)पर्यावरण खूबसूरत बने लगे निराला । 6)प्रकृति हरी सुंदर बनाना है अप्रदुषित । 7) पेड़ लगाना अधिकार हमारा नारा सबका । 8)कारखाने से धुएं का उत्सर्जन बीमार दिल । 9) ज्वलंत मुद्दा परिवेश हो साफ करो विचार । 10)शिक्षा माध्यम हटाओ प्रदूषण जीवन खिले । 11) प्लास्टिक थैली घातक बनी अब जान ले रही । 12 )बहती नदी गंदगी से दूषित दुखी हो रही । 13) महत्त्वपूर्ण सफाई अभियान जागे सब ही । 14) समुद्र तट निर्मल सदा रहे ध्यान जरुरी । आभा दवे मुंबई
आज अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस है। अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस प्रतिवर्ष 15 मई को मनाया जाता है ताकि समाज की मूलभूत इकाई के रूप में परिवारों के महत्व को उजागर किया जा सके। अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस की घोषणा संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 1993 में की गई थी और इसे पहली बार 1994 में मनाया गया था। सभी को अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ 🙏🙏💐💐💐💐 परिवार /कुटुंब -------------------- जी तो लेते हैं सभी यहाँ पर अकेले पर बिना परिवार के नहीं यह मेले । माँ की गोद में बीतता है बचपन सभी का परिवार के संग ही बच्चे सब हैं खेले । कैसे भुला दें बचपन की वो सारी यादें हमारी माँ -पिता ने बच्चों की खातिर दुख सहे अकेले। परिवार ही होता है दुनिया ये सारी लगती न्यारी सुख-दुख में सभी साथ आते हैं हरदम पहले। स्वस्थ और कुशल रहे सभी का कुटुंब-परिवार चारों दिशाओं में फैले उसके निर्मल उजाले । आभा दवे मुंबई
महाराणा प्रताप (9 मई 1540 - 19 जनवरी 1597) आज महाराणा प्रताप जी की जयंती पूरे देश में मनाई जा रही है। महाराणा प्रताप जी की वीरता और त्याग की गाथा पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। मेवाड़ के शासक महाराणा प्रताप जी का जन्म 9 मई 1540 को कुंभलगढ़ दुर्ग में हुआ था। महाराणा प्रताप जी का जन्म उत्सव उनकी वीरता और स्वाभिमान का प्रतीक है, जो आज भी प्रेरणा प्रदान करता है। महाराणा प्रताप जी मेवाड़ (राजस्थान) के सिसोदिया राजवंश के एक महान राजपूत योद्धा थे, जिन्होंने अकबर की अधीनता स्वीकार करने के बजाय आजीवन संघर्ष किया। उन्होंने 1572 में गद्दी संभाली। 1576 के हल्दीघाटी युद्ध और बाद में छापामार युद्ध नीति से उन्होंने मुगलों को कड़ी टक्कर दी और मेवाड़ के स्वाभिमान की रक्षा की। महाराणा प्रताप द्वारा घास की रोटी खाने की कहानी उनके अदम्य साहस और मुगलों के सामने न झुकने के संकल्प का प्रतीक है। हल्दीघाटी युद्ध के बाद, जब वे जंगलों में थे, तब उन्होंने मुगलों से लड़ने के लिए राजसी सुख त्यागकर जंगली घास (कोदो/रागी) के बीजों से बनी रोटियां खाई थीं। महाराणा प्रताप जी को सादर नमन करते हुए प्रस्तुत है श्याम नारायण पांडेय जी द्वारा रचित रचना 🙏 🙏 स्वर्गीय श्याम नारायण पाण्डेय द्वारा रचित "चेतक की वीरता" हल्दीघाटी के युद्ध पर आधारित कविता वीर रस की कालजयी रचना है, जो महाराणा प्रताप के अदम्य साहस, चेतक की स्वामी भक्ति और मेवाड़ के स्वाभिमान को दर्शाती है। चेतक की वीरता -------------------- रण-बीच चौकड़ी भर-भरकर,चेतक बन गया निराला था। राणा प्रताप के घोड़े से,पड़ गया हवा को पाला था॥ गिरता न कभी चेतक-तन पर,राणा प्रताप का कोड़ा था। वह दौड़ रहा अरिमस्तक पर,या आसमान पर घोड़ा था॥ था यहीं रहा अब यहाँ नहीं वह वहीं रहा था यहाँ नहीं थी जगह न कोई जहाँ नहीं किस अरिमस्तक पर कहाँ नहीं जो तनिक हवा से बाँग हिली,लेकर सवार उड़ जाता था। राणा की पुतली फिरी नहीं,तब तक चेतक मुड़ जाता था॥ कौशल दिखलाया चालों में,उड़ गया भयानक भालों में। निर्भीक गया वह ढालों में,सरपट दौड़ा करवालों में॥ फँस गया शत्रु की चालों में बढ़ते नद-सा वह लहर गया फिर गया गया फिर ठहर गया विकराल वज्रमय बादल-सा अरि की सेना पर घहर गया। भाला गिर गया गिरा निसंग हय घोड़ा टापों से खन गया अंग बैरी समाज रह गया दंग घोड़े का ऐसा देख रंग। संकलन / प्रस्तुति आभा दवे चित्र गूगल से साभार 🙏
आज विश्व हास्य दिवस है ।विश्व हास्य दिवस विश्व भर में मई महीने के पहले रविवार को मनाया जाता है। इसका प्रथम आयोजन ११ जनवरी, १९९८ को मुंबई में किया गया था, ऐसा कहा जाता है। विश्व हास्य योग आंदोलन की स्थापना का श्रेय डॉ मदन कटारिया को जाता है। हास्य जीवन में उत्साह वर्धन करता है इस लिए इसे योगा का भी एक हिस्सा माना गया है । जगह-जगह सुबह लोग हास्य योग करते दिखे जाते हैं । सभी को हास्य दिवस की शुभकामनाएँ 🙏🙏 --------------------------------------- हँसी ------- निगाहें मिला लो जरा मुस्कुरा दो मासूम चेहरों को थोड़ा हँसा दो हैं आँखों में उनकी उदासी, दिल है खाली कोई गीत प्यारा सा उनको सुना दो। तरसते हैं दिल है बड़ी मुश्किल न घबराना आएगा अच्छा भी पल दादी - नानी की कोई कहानी सुना दो हँसी - हँसी में महका दो आने वाला कल। वो रिश्तो की डोरी वह बचपन की मस्ती खिलौनों में प्यारी वह गुड़ियों की हस्ती रूठना मनाना फिर खिलखिलाना यादों की यह चीजें नहीं है सस्ती। हँस कर सारे गम को भुला दो दूर रहकर भी एक - दूजे को हँसा दो अपने हाथों में कुछ भी नहीं है यहाँ पर यही सोचकर होठों पर तबस्सुम खिला दो। आभा दवे मुंबई चित्र गूगल से साभार 🙏
ગુજરાત દિવસની હાર્દિક શુભેચ્છાઓ🙏🙏 આજે ગુજરાત દિવસ છે, સૂર અને સંગીત રેલાયા છે, ગુજરાતની શાન અનોખી છે, સૌથી અલગ એનો અંદાજ છે. આભા દવે ૧-૫-૨૦૨૬ શુક્રવાર જય ગરવી ગુજરાત
मजदूर दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏 मजदूरी का सम्मान -------------------------- चिलचिलाती धूप में वो बनाता है मकान आलीशान जिसका खुद के रहने के लिए भी नहीं होता मकान पर उसके चेहरे पर रहता नहीं है कोई भी मलाल रह जाएगा उसके ही काम का इस धरा पर निशान । स्त्री ,पुरुष और बच्चे ढो रहें हैं ईंट-गारा चल रहा है उनका इस काम से ही घर सारा धन की खातिर सह रहे हैं काम का बोझ कोई शिकवा शिकायत नहीं, न कहीं है इशारा। वैसे तो सभी विश्व में मजदूरी ही कर रहे हैं अपने-अपने परिवारों का पेट भर रहे हैं सभी करें एक-दूसरे के कामों का सम्मान कहें, हम एक - दूजे को प्यार से धर रहे हैं। आभा दवे मुंबई
Copyright © 2026, Matrubharti Technologies Pvt. Ltd. All Rights Reserved | Powered by Custom Web Development Company India.
Copyright © 2026, Matrubharti Technologies Pvt. Ltd. All Rights Reserved.
Please enable javascript on your browser