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अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏 मातृभाषा -------------- मातृभाषा कराती है एक अलग ही पहचान छुपा हुआ जिसमें परंपरा - संस्कृति का ज्ञान माँ की ममता सा आभास कराती खुद से मिलाती सदा ही होता रहे यूँही अपनी मातृभाषा का सम्मान। માતૃભાષા કરાતી હૈ એક અલગ હી પહેચાન છુપા હુવા જિસમેં પરંપરા - સંસ્કૃતિ કા જ્ઞાન માં કી મમતા સા આભાસ કરાતી ખુદ સે મિલાતી સદા હી હોતા રહે અપની માતૃભાષા કા સમ્માન. ( આભા દવે ) आभा दवे અતીત ---------- અતીતની યાદો આવીને બેઠી છે દ્વાર, વીતેલી પળો કરી રહી હતી ઈંતઝાર. માસૂમ બાળપણની એ હસીન યાદો, દાદીમાની વાર્તાઓનો એવો ખુમાર. રાજા-રાણીની એ અનોખી કહાણી, રોજ સાંભળતા અમે દાદીમાની જુબાની. દરેક વાર્તાની શૈલી હતી નિરાલી, છુપાયેલી રહેતી એમાં મહાનતાની નિશાની. થઈ જતી જ્યારે અચાનક વીજળી ગુલ, સાથે બેસીને વાતો કરતા સૌ હળી-મળી ગુલ. વીજળી પાછી આવતા એ હોબાળો ને શોર, મળતો હતો સૌને આનંદ અતુલ. દરેક નાની ખુશીઓ આંગણું મહેકાવતી, દોલતની દીવાલ ક્યારેય વચ્ચે ન આવતી. પોતાના-પારકાનો ભેદ સમજતા નહોતા, અતીતની યાદો આજે વર્તમાન સાથે અથડાતી. આભા દવે
शिवाजी जयंती (19 फरवरी ) ----------------------------------- मराठा साम्राज्य के संस्थापक महान योद्धा राजा छत्रपति शिवाजी महाराज की आज जयंती है। उनकी देशभक्ति और वीरता को बड़े सम्मान के साथ याद किया जाता है। शिवाजी महाराज की जयंती पर सादर नमन करते हुए प्रस्तुत है शिवाजी महाराज और गुरु रामदास जी की एक कहानी 🙏🙏 शिवाजी- रामदास ------------------------ बहुत समय पहले की बात है शिवाजी महाराज रामदास जी के पास विद्या अभ्यास करते थे। एक दिन शिवाजी महाराज ने गजानंद नाम के लड़के को उठाकर पटक दिया। इस कार्य को देखकर गुरु रामदास शिवाजी से अप्रसन्न हुए । उन्होंने शिवाजी महाराज को बुलाकर कहा कि, "आज मैं तुमसे अप्रसन्न हूँ क्योंकि तुमने गजानन को पटक दिया है उसे चोट पहुँची है।" शिवाजी महाराज ने कहा कि, "गुरु जी , इसमें मेरा क्या दोष है? आप ने ही सिखाया है कि निर्बलों की रक्षा करनी चाहिए। गजानंद कमजोर बाल गोपाल को बुरे शब्द कह रहा था । बेचारे बाल गोपाल रो रहे थे । इसमें मेरा क्या अपराध है?" तब रामदास जी ने कहा कि पाठशाला में सब की रक्षा का भार मेरे ऊपर है। तुम्हें गजानंद को सजा देने का अधिकार नहीं है , यह अनुचित बात है। शिवाजी महाराज ने गुरु रामदास से माफी माँगी और भविष्य में ऐसा कार्य न करने की प्रतिज्ञा की। इस पर गुरु रामदास ने कहा कि, "मैं तुम पर प्रसन्न हूँ। मुझे तुमसे बड़ी आशाएँ हैं कि तुम देश की सेवा के लिए तन , मन, धन, कुर्बान करोगे। सारा जीवन देश के लिए अर्पण करोगे।" यह सुनकर शिवाजी महाराज ने गुरु के चरण छू कर प्रतिज्ञा की कि , "मैं जीवन भर अपना सब कुछ देश के लिए अर्पण करुँगा ।" यह सुनकर रामदास जी खुश हुए और उसे अपनी शुभकामनाएँ दी। शिवाजी महाराज ने जीवन पर्यंत इस प्रतिज्ञा का पालन किया और अपना सर्वस्व देश पर न्यौछावर कर दिया। संकलन/ प्रस्तुति आभा दवे मुंबई
सुभाष चन्द्र बोस (, जन्म: 23 जनवरी 1897, मृत्यु: 18 अगस्त 1945) भारत के स्वतन्त्रता संग्राम के अग्रणी तथा सबसे बड़े नेता थे। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान, अंग्रेज़ों के खिलाफ लड़ने के लिये, उन्होंने जापान के सहयोग से आज़ाद हिन्द फौज का गठन किया था। उनके द्वारा दिया गया जय हिंद का नारा भारत का राष्ट्रीय नारा बन गया है। "तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूँगा" का नारा बुलंद किया । जो उस समय अत्यधिक प्रचलन में आया।भारतवासी उन्हें प्यार से नेता जी के नाम से पुकारते हैं। स्वतंत्रता आंदोलन में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने वाले सुभाष चंद्र बोस जी का आज जन्मदिन है उनको सादर नमन करते हुए एक प्रेरक प्रसंग प्रस्तुत है🙏🙏 संकल्प और एकाग्रता ---------------------------- बात नेताजी सुभाषचंद्र बोस के बचपन की है जब वे स्कूल में पढ़ा करते थे। बचपन से ही वे बहुत होशियार थे और सारे विषयो में उनके अच्छे अंक आते थे, लेकिन वे बंगाली में कुछ कमजोर थे। बाकी विषयों की अपेक्षा बंगाली मे उनके अंक कम आते थे। एक दिन अध्यापक ने सभी छात्रों को बंगाली में निबंध लिखने को कहा। सभी छात्रों ने बंगाली में निबंध लिखा। मगर सुभाष के निबंध में बाकी छात्रों की तुलना में अधिक कमियाँ निकली। अध्यापक ने जब इन कमियों का जिक्र कक्षा में किया तो सभी छात्र उनका मजाक उड़ाने लगे। उनकी कक्षा का ही एक विद्यार्थी सुभाषचंद्र बोस से बोला- “वैसे तो तुम बड़े देशभक्त बने फिरते हो मगर अपनी ही भाषा पर तुम्हारी पकड़ इतनी कमजोर क्यों है।” यह बात सुभाषचन्द्र बोस को बहुत बुरी और यह बात उन्हें अन्दर तक चुभ गई। सुभाषचंद्र बोस ने मन ही मन निश्चय कर लिया कि वह अपनी भाषा बंगाली सही तरीके से जरुर सीखेंगे। चूँकि उन्होंने संकल्प कर लिया था इसलिये तभी से उन्होंने बंगाली का बारीकी से अध्ययन शुरू कर दिया। उन्होंने बंगाली के व्याकरण को पढ़ना शुरू कर दिया, उन्होंने दृढ निश्चय किया कि वे बंगाली में केवल पास ही नहीं होंगे बल्कि सबसे ज्यादा अंक लायेंगे। सुभाष ने बंगाली पढ़ने में अपना ध्यान केन्द्रित किया और कुछ ही समय में उसमे महारथ हासिल कर ली। धीरे-धीरे वार्षिक परीक्षायें निकट आ गई। सुभाष जी की कक्षा के विद्यार्थी सुभाष जी से कहते – भले ही तुम कक्षा में प्रथम आते हो मगर जब तक बंगाली में तुम्हारे अंक अच्छे नहीं आते, तब तक तुम सर्वप्रथम नहीं कहलाओगे। वार्षिक परीक्षाएं ख़त्म हो गई। सुभाष सिर्फ कक्षा में ही प्रथम नहीं आये बल्कि बंगाली में भी उन्होंने सबसे अधिक अंक प्राप्त किये। यह देखकर विद्यार्थी और शिक्षक सभी दंग रहे गये। उन्होंने सुभाष से पूछा – यह कैसे संभव हुआ ? तब सुभाष विद्यार्थियों से बोले – यदि मन ,लगन ,उत्साह और एकाग्रता हो तो, इन्सान कुछ भी हासिल कर सकता है। संकलन /प्रस्तुति आभा दवे कदम कदम बढ़ाए जा --------------------------- क़दम क़दम बढ़ाए जा सुभाष चन्द्र बोस द्वारा संगठित आज़ाद हिन्द फ़ौज का तेज़ क़दम ताल गीत था। इसके बोल लखीमपुर खीरी के अवधी कवि और स्वतंत्रता सेनानी वंशीधर शुक्ल ने लिखे थे। क़दम क़दम बढ़ाए जा वंशीधर शुक्ल क़दम क़दम बढ़ाए जा ख़ुशी के गीत गाए जा; ये ज़िंदगी है क़ौम की, तू क़ौम पे लुटाए जा। उड़ी तमिस्र रात है, जगा नया प्रभात है, चली नई जमात है, मानो कोई बरात है, समय है, मुस्कुराए जा, ख़ुशी के गीत गाए जा। ये ज़िंदगी है क़ौम की तू क़ौम पे लुटाए जा। जो आ पड़े कोई विपत्ति मार के भगाएँगे, जो आए मौत सामने तो दाँत तोड़ लाएँगे, बहार की बहार में बहार ही लुटाए जा। क़दम क़दम बढ़ाए जा, ख़ुशी के गीत गाए जा। जहाँ तलक न लक्ष्य पूर्ण हो समर करेंगे हम, खड़ा हो शत्रु सामने तो शीश पै चढ़ेंगे हम, विजय हमारे हाथ है विजय-ध्वजा उड़ाए जा। क़दम क़दम बढ़ाए जा, ख़ुशी के गीत गाए जा। क़दम बढ़े तो बढ़ चले, आकाश तक चढ़ेंगे हम, लड़े हैं, लड़ रहे हैं, तो जहान से लड़ेंगे हम; बड़ी लड़ाइयाँ हैं तो बड़ा क़दम बढ़ाए जा। क़दम क़दम बढ़ाए जा ख़ुशी के गीत गाए जा। निगाह चौमुखी रहे, विचार लक्ष्य पर रहे, जिधर से शत्रु आ रहा उसी तरफ़ नज़र रहे, स्वतंत्रता का युद्ध है, स्वतंत्र होके गाए जा। क़दम क़दम बढ़ाए जा, ख़ुशी के गीत गाए जा। ये ज़िंदगी है क़ौम की तू क़ौम पे लुटा
https://youtube.com/shorts/cL-w4fltIAw?si=31rUSpFIuldOQ3GW सुप्रभात 🙏 सभी को वसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🙏
https://youtube.com/shorts/ZIexeY9IOu0?feature=shared बाल कविता
https://youtube.com/shorts/P6sz4hn77zM?si=lyUEhxvYzteey7HI
लोहड़ी ---------- जीवन में हँसी - खुशी ,उमंग जगाए लोहड़ी तिल -गुड़ , मूंगफली नयी फसलों संग लहराए लोहड़ी ढोल -मंजीरा ,अग्नि संग आती है खुशहाली मिल जुलकर कर रहना सिखलाती है लोहड़ी। आभा दवे मुंबई
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