हसरतों ओ जमाल है बेकरार हरेक निगाह से,
दुनिया को दूर रख सियावरराम बढते गुनाह से।
आँखों में छुपी है इक तस्वीर हर रष्क ए अरमान से,
पाने का जुनून ए हूदह है इस दिल-ए-नादान से।
राम नाम सफ़र में रहे तू साथ मेरे राहज़ान से,
लफज ए जिक्र है कुछ वक्फा मेरी दास्तान से।
तेरे इश्क में है सुकून मेरी हरजबा दरमियान से,
राह ए तरनुम गुलजा तेरे हुस्न-ए-दरोजांन से।
वो सब फासले मिटे जनाब ए मुष्कालात से,
चमकती राह-ए-चश्म-ए-नाम तेरे जहाँ से।
अदा-ए-हुस्न-ओ-जमाल बरसात अरमान से,
साथ प्यारा हर पल दरिया हुस्न-ए-रावां से।
ख़्वाब-ए-हयान गुज़र जाए ये उमर आसां से,
ज्नाब-ए-नाहीद-ए-दीद तेरे हुस्न-ए-रावां से।
बदलते है रिष्ते रहबर, तेरे नूर-ए-जानां से,
ज़िंदगी है युंरोशन तेरे इश्क-ए-दिलोंजान से।
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सप्रेम-स्वरचित मनोरजंन मनोरथपूर्ण भाव सहित
केवल चितंन योग्य, मय आंनन्द,अकथ बस, नेपथ्य में बहुत कुछ सामाजिक,आर्थिक और राजनैतिक परिदृश्य के मांनिद ,
© जुगल किशोर शर्मा-बीकानेर-9414416705