मैं हूँ एक शून्य
सुनो , तुम भी शून्य हो जाओ
ना मैं घट पाऊँ
और ना तुम बढ़ पाओ
ना तुमसे गुणा हो पाऊँ
ना तुम मुझसे
ना मैं ज्यादा
ना तुम कम
जिसके भी पीछे लग जाए
उसकी किस्मत बन जाए
मूल्यवान है हम सबसे
सबसे छोटे हो कर भी
सबसे बड़े है
हम किसी की होड़ में नही
हम ऊँचे नीचे में नही
हम स्थिर है
धरा की तरह
सूरज की तरह
चांद की तरह
बस एक आकृति में
एक रूप में
बस शून्य ।