हालाँकि हम तो बहुत मुरजाये उनसे,
गुरुर मे गुलिस्ता जैसे होकर आशिक़ हुए,

तूफ़ाँ आए तो तबाह होने के आशियाने हुए,
सितारे चमके बहुत से पर धुआँ गुला तो फनाह हुए,

फूल भी आँगन की धूप मे बचने मे ढूँढते मुझे अब तो,
मेरा ही दिल है चाँद क्या यार ये सब तो मुझ पर महेमां हुए,

नजरो मे गिरे तो गुमते ही रह गए शदमे का रंग बस जवा ही रहे,
सलाम ए मोहब्बत को अब शेर शायरी के अल्फाज भी ताजा हुए ।

DEAR ZINDAGI ☺

Hindi Shayri by Dear Zindagi : 111938698
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