सत्य का सामना तो,
सत्य ही कराएगा।
झूठ की तो प्यारे
बोलती बंद है।।
पाप क्या है, पुण्य क्या है।
सब ढकोसले है, मन के
मुक्ति की राह तो,
धर्म ही दिखाएगा।।
अधर्म की तो प्यारे
दुनिया गोल है।
बाहर कुछ,
भीतर कुछ
मैं-मेरा,
तू-तेरा
जब तक रहेगा।
तब तक तो प्यारे,
झोल ही झोल है।।
जब तक ना बने,
तेरा दुख मेरा।
अधम हूं मैं।।
मौन तेरा,
मुझे वाणी दे।
तभी समझ प्यारे,
तेरा हूं मैं।।