भावना में बहकर अनुभव बोला:-' प्रेरणा, यदि तुम नहीं मिलती तो मैं जी नहीं पाता। '
प्रेरणा:-' मैं जानती हूं आप भावनाओं में बह जाते हो और अपने emotion को रोक नहीं पाते। तुम्हारे पीछली जिंदगी के बारे में जानती हूं। तुम्हारी जगह दूसरा कोई होता तो अपना जीवन समाप्त कर देता। अपनी पहली प्यारी पत्नी को आप भूल नहीं सकते। मैं सदनसीब हूं कि मुझे आप जैसा पति मिला।'
अनुभव:-' तुम जानती थी कि मेरी शादी पहले हो चुकी थी और अपनी लक्ष्मी को गंवा बैठा फिर भी तुमने मुझसे शादी की। तुम्हारे प्रेम को मैं समझ सकता हूं। तुम्हारे ह्रदय में मेरे प्रति प्रेम है साथ साथ मेरी लक्ष्मी की संतान से भी प्रेम है। गायत्री को अपनी बेटी मानती हो।'
प्रेरणा:-' इतना emotion मत हो। मेरी फ़र्ज़ है। मैं गायत्री को अपनी बेटी मानती हूं जैसे मेरी बेटी आकांक्षा है।'
( मेरी कहानी 'एक कहानी अनुभव नी ' गुजराती स्टोरी मातृभारती पर)
- कौशिक दवे
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