उन्हें अपना हिस्बेहाल दे देते हैं, दिल के अरमान,
नजरे फक्त जाम बहार है, सांसे भी दूर कर देती है।
“शायद दोस्त ही बन जाएँ,“ एक आम सी बात,
दिल में शीशा बन कर, हर दर्द बना देती है।
उन्हें अपना हिसाब दे देते हैं, दिल के अरमान,
रक्स बमुश्किल बया है ए जिंदगी सउर कर देती है।
हर शब-ए-तन्हायी में, उनका तसव्वुर है,
उनकी निगाह-ए-मोहब्बत, दिल को मजबूर कर देती है।
“शायद दोस्त ही बन जाएँ,“ एक आम सी बात,
मगर ये गुफ़्तगू बेअसर, दिल को मसरूर कर देती है।
जब भी वो बैठते हैं, महफ़िल में रंग भर जाते हैं,
उनका यु खिलखिलाना, हर ग़म को बेदूर कर देती है।
दिल-ए-बेक़रार में, एक आरज़ू जागती है,
उनकी सूरत हर एक ख़्वाब को मंज़ूर कर देती है।
उनकी जुबान से निकलती है, शेर-ओ-शायरी,
उनकी हर कहीबात, जिंदगी को मगरूर कर देती है।
वो जो कहीं भी हो जनाब, उनका साया साथ है,
उनकी यादों सरेइकबाल, दिल को महबूब कर देती है।
कुछ लम्हे उनके साथ, चांदनी रातों का नूर,
उनका बतलाना, हर साथ को सजाकर देती है।
हर बार जब वो मिलते हैं, खुशबू से महकते हैं,
उनकी नरमी, हर जज्बात को मजबूर कर देती है।
उन्हें अपना हिसाब दे देते हैं, दिल के अरमान,
कुछ कुछ रही है, जिंदगी याद ए दीदार कर देती है।