### बचपन की मिठास: देसी आम
वो देसी आम के दिन, बचपन की मिठास,
लोटा भर के रस पिया, वो था खास।
आम की महक, वो बगिया की बयार,
माँ के हाथों से छिले, लाजवाब हर बार।
पीले-पीले आम, जैसे सूरज की चमक,
मिठास में घुली हुई, हर बाइट में ललक।
दोस्तों संग मिलकर, पेड़ पर चढ़ जाना,
पकने से पहले ही, आम को तोड़ लाना।
मिट्टी की खुशबू, आम की मिठास,
बचपन की यादें, दिल में रहीं पास।
लोटा भर के आम का रस, पीना सुबह-सुबह,
जीवन का वो समय, कभी न आए दुबारा।
आम के बाग में दौड़ना, छांव में सुस्ताना,
माँ की डांट से बचकर, आम चुराना।
वो दिन थे सच्चे, वो पल थे प्यारे,
आम के साथ जीये, बचपन के सहारे।
अब भी याद आता है, वो लोटा और आम,
वो बचपन का समय, वो सुकून भरे शाम।
कहते हैं सभी, ऐसा स्वाद नहीं कहीं,
बचपन की वो मिठास, देसी आम की मिठाई।
कहते हैं, बचपन के दिन और देसी आम की मिठास,
नहीं मिलते कहीं और, वो प्यार भरी मिठाई।
बचपन की यादें, दिल में संजोई रहेंगी सदा,
देसी आम की मिठास, है सबसे जुदा।
#Mango