અજાણ્યો પત્ર - 09
शिक्षक दिन के इस अवसर में भी मुझे तुम्हारी ही याद आई पता है क्यू? क्योंकि तुमने ही मुझे प्रेम की भाषा को पढ़ना सिखाया, खुद के जीवन का अपवाद बनाया, समझाया की मैं तुम्हारा जीवन के तत्व से नहीं जुड़ सकता ! क्योंकि मेरे अंदर वो सामर्थ्य नहीं है की मैं तुजसे मिल कर कोई अणु बन शकु।