राजनीति के खेल में,
परिवर्तन है आवश्यक।
लोकतंत्र के इस देश में,
जनहित ही हैं आवश्यक।
नव जीवन की उम्मीद,
नई दिशा को यहां दिखाती।
राजनीति की राह में,
हर चुनौती को ये हराती।
इन्कलाब की चिंगारियो से,
जनता यहां मोर्चा संभाले।
झूठे वादों की इस नगरी में,
सच का झंडा गाड़ दे।
पैसा और सत्ता के भूखे ये,
गरीबों के हक़ को दबाया।
अमीरों की थाली में,
जनता का हक़ उन्होंने सजाया।
यह नए युग का प्रारंभ है,
यह नए कल की शुरुआत।
अब जब कभी ऐसा होगा,
तब तब आवाज हमें उठानी होगी,
इन्कलाब के नारो से,
साहस अब हमें दिखानी होगी।
तब जाके हर जगह गूंजेगा इन्कलाब।
हर जन , मन और दिल में,
उठेगा एक नई क्रांति का सैलाब।
जय हिंद। जय महाराष्ट्र।🙏🏻🇮🇳🇮🇳