Hindi Quote in Poem by S Sinha

Poem quotes are very popular on BitesApp with millions of authors writing small inspirational quotes in Hindi daily and inspiring the readers, you can start writing today and fulfill your life of becoming the quotes writer or poem writer.

Heart touching Kabir's poem

जीते भी लकड़ी मरते भी लकड़ी,
देख तमाशा लकड़ी का,
क्या जीवन क्या मरण कबीरा,
खेल रचाया लकड़ी का,

जिसमे तेरा जनम हुआ,
वो पलंग बना था लकड़ी का,
माता तुम्हारी लोरी गाए,
वो पलना था लकड़ी का,
जीते भी लकड़ी मरते भी लकड़ी,
देख तमाशा लकड़ी का,

पड़ने चला जब पाठशाला में,
लेखन पाठी लकड़ी का,
गुरु ने जब जब डर दिखलाया,
वो डंडा था लकड़ी का,
जीते भी लकड़ी मरते भी लकड़ी,
देख तमाशा लकड़ी का,

जिसमे तेरा ब्याह रचाया,
वो मंडप था लकड़ी का,
जिसपे तेरी शैय्या सजाई,
वो पलंग था लकड़ी का,
जीते भी लकड़ी मरते भी लकड़ी,
देख तमाशा लकड़ी का,

डोली पालकी और जनाजा,
सबकुछ है ये लकड़ी का,
जनम-मरण के इस मेले में,
है सहारा लकड़ी का,
जीते भी लकड़ी मरते भी लकड़ी,
देख तमाशा लकड़ी का,

उड़ गया पंछी रह गई काया,
बिस्तर बिछाया लकड़ी का,
एक पलक में ख़ाक बनाया,
ढ़ेर था सारा लकड़ी,
जीते भी लकड़ी मरते भी लकड़ी,
देख तमाशा लकड़ी का,

मरते दम तक मिटा नहीं भैया,
झगड़ा झगड़ी लकड़ी का,
राम नाम की रट लगाओ तो,
मिट जाए झगड़ा लकड़ी का,
जीते भी लकड़ी मरते भी लकड़ी,
देख तमाशा लकड़ी का,

क्या राजा क्या रंक मनुष संत,
अंत सहारा लकड़ी का,
कहत कबीरा सुन भई साधु,
ले ले तम्बूरा लकड़ी का,
जीते भी लकड़ी मरते भी लकड़ी,
देख तमाशा लकड़ी का .

Hindi Poem by S Sinha : 111932898
New bites

The best sellers write on Matrubharti, do you?

Start Writing Now