हम सब में जिंदगी,
हम सब में जिंदगी, गर दरिया समन्दर हैं
बे-वज़न दगाबाज, इकतेदार हमसफ़र हैं
हम सब हैं जिंदगी, जो बनाकर मिटाकर हैं
सोना चाँदी मिटटी, जख्म रोटी गरअसर है
दरिया से हम चले, मगर दरिया से जुदा गर है
जिसे हम समझते हैं, वो ख्वाब हकीकत मगर है
हम सब हैं जिंदगी, जो ताजरूबा-ए-हस्ती सर हैं
हर आह से मोहताज, हर ख़ुशी अदल बदलकर है
लब-ए-दरिया पर, हर एक कदम सोच में पर है
हम दरिया से दूर, मगर दरिया हमगर बसकर है
हम सब हैं जिंदगी, जो लहरों की कहानी भर है
जो दरिया में घुल कर भी, दास्तान-ए-मुंतज्जर ळे
हम सब है जिन्दगी, तारा ए दरमियानी सजाकर है
महफूज कुफर खिताब अदावत क्या इल्तजा कसकर है
हम सब है जिन्दगी, नाहक है जिन्दगी नुपर शर्माकर है
बस बदले है सनातन आजादी ए टूकर टूकर जंचाकर है
हम सब है जिन्दगी, स्वाती आतिष ए मर्लिन लकबघर है
शरातत शराफत, ताज सादाब एक हकारात, किस्से भर है
हम सब है जिन्दगी, अरविद मुख्त्यारा अजादमुकर है
बस किस्से है कहानियॉं है अन्ना, कुमार जिद कर है
© जुगल किशोर शर्मा बीकानेर
आयुर्वेद का पहला नियम भोजन दवा रूपी ही ग्रहण करे ।