रोज़ आते हैं चेहरे बदल के।
दिन बहुत गर्म हैं आजकल के।
धूप अंगार बरसा रही है
छाँव हर बार तरसा रही है
भोर आतंक की सहचरी है
साँझ भी आज कितनी डरी है
हैं सितारे ये, छींटे गरल के।
दिन बहुत गर्म हैं आजकल के।
इस क़दर धूल उड़ने लगी है
अब कहाँ फूल पर ताज़गी है
सिर्फ़ काँटे बड़े हो रहे हैं
हर क़दम पर खड़े हो रहे हैं
फूल तो हैं यहाँ एक पल के।
दिन बहुत गर्म हैं आजकल के।