#Reading
मैं और मेरे अह्सास
चेहरे पर चहेरा लगाए घूम रहे हैं यहाँ l
होठों पर जाम लगाए झूम रहे हैं यहाँ ll
तुम से क्या कमाना एसा बोलकर वो l
दोस्ती की आड़ में लूट रहे हैं यहाँ ll
चहेरा पढ़ना इतना भी आसान नहीं l
सब म्हारो के पीछे छीप रहे हैं यहाँ ll
सखी
दर्शिता बाबूभाई शाह