आँखों मे बैठा, दिल मे उतरा , मन से भटका एक इंसान हु मे,
छबी कही छुपी ,धुंधली है हर कदम की छाव कुछ इस तरह भटका हु मे,
निर् के एक रास्ते को समुंदर मान चुका #अहंकार ऐसा ले बैठा हु मे,
कर्म करता रहा मिथ्या को सम्मान देता रहा हर चक्रव्यूः मे फस्ता रेगिस्तान हु मे,
सर्व गुण सम्पन्न ,मे ही सच्चा मे ही जीवन दाता कई दायरे से लिखता हु मे,
तत्वहीँ मे, शून्य से आविष्कार है, मतिभ्रम करने वाला, प्रतिबिंब भी छूना पाए मुझे वो आत्मा हु मे,
भ्रम का आसरा सदा रहे जीवन की राह भटका ने मे ऐसा कुछ अंदाज मे #अहंकार हु मे,
त्याग इस भ्रम को संस्कार को अपना वरना पूरी जिंदगी भर रहने वाला मिट जाने तक का इंतजार हु मै।
DEAR ZINDAGI 🙏