जीवन के उस मोड़ पर हूँ जहाँ खुद पर आत्मविश्वास नहीं है। मैं खुद को ही ख़ारिज कर रहा हूँ। मैं स्वयं को किसी के लायक नहीं समझता। मैं इतना बेबाक हूँ कि सब कुछ बता देना चाहता हूं। मुझे सही-गलत की परवाह नहीं। मैं हर दिन, हर क्षण खुद से हार जाता हूँ। मुझे हर दिन बदलना है। जीतना है।