॥ जीवन और संघर्ष ॥
जब कर लिया संकल्प स्वयं से,
तो पीछे मुड़ कर देखना क्यूँ।
कि जिंदगी का भला होगा या बुरा ये सोचना क्यूँ।।
जब कर लिया, शांत सब इच्छाओं को,
तो अब दमित इच्छाओं की चाह रखना क्यूँ।
जब मान लिया कि संघर्ष ही है सब कुछ इस जिंदगी में,
तो पीछे हटने का विकल्प चुनना क्यूँ।
जब कर लिया प्रण मंज़िल को पाने का ,
तो पथ से डिगना क्यूँ,
बस चलते ही जाना है, तो रुकने का सोचना क्यूँ।
जब सोच ही लिया कि रास्ते के पत्थर,
मार्ग को अवरुद्ध नहीं कर सकेंगे
तो निर्णय से डगमगाना क्यूँ।
चलते चलो , चलते चलो, राह को
अपनी एक सफलता की सीढ़ी सी मानकर चढ़ते चलो।
कभी तो दुःख के बादल छंटेंगे,
रंग खुशहाली के कभी तो मन को हरेंगे।
बस हम अपने साथ और साथियों का ,
मार्ग भी प्रशस्त करते चलेंगे।
हिम्मत को न टूटने देना कभी ,
इन बंजर रास्तों पर भी एक न एक दिन
सुंदर फूल मुस्कान लिए ज़रूर खिलेंगे। - ©️ जतिन त्यागी