यूंही न जाने कितनी तस्वीरें संभाल ली मैंने ,
हर किसी में कुछ न कुछ तुझ सा नजर आता है ।
बहुत बातें कर लेते हैं तेरी , तेरी तस्वीरो से ,
तुझ से ज्यादा अपनापन तेरे ख्यालों में आने से मिल जाता है ।
कभी फुर्सत मिले तो गौर से देखना हमें ,
अब तो मेरे हर अक्स में तू ही नज़र आता है ।
बहुत शिकायतें रही तुम्हें मेरी खामोशी से ,
कभी तन्हा बैठो किसी दरख़्त के नीचे
और बातें करो मेरी यादों से ।
फिर बताना जरूर कि मेरी बातों में तेरा वो तीखा लहज़ा कितना मीठा नज़र आता है ।।
© जतिन त्यागी