अश्क आंखों के छुपा कर के चला
फिर कोई नया बहाना में कर चला
चूभ रहा है मेरी आंखो में कुछ
ये झूठ में सब को बता कर चला
रो लेता हूं जोर से में तन्हाई में
मुस्कुराता चेहरा दिखा कर चला
ये हंसना मुसुकराना तो बहाना है
में राज दिल के कितने दबा कर चला
गलती से बात आ जाए जुबां पर
मैं अपनी ही बाते घुमा कर चला
दामन में सब के फूल ही भरे मेने
सेज कांटो की अपनी सजा के चला
दर्द ओ गम ही रहा है नसीब मेरे
में खुद को खुशनसीब बता कर चला
"गुमनाम शायर"