मैं से मुक्त होना ही मोक्ष है।
मुझे अपने अन्दर की अहम से मुक्त हो कर निकलना है।
मैं स्वयं को क्या जानती हूं।
मेरा अहम क्यों प्रिय है मुझे।
उसमें क्या सुख है चैन है।
मुझे अपने अन्दर की अहम से मुक्त होकर निकलना है।
मैं क्यों हूं क्या हुं स्व की क्या इतनी क्षमता।
इतना गुरूर क्यों किस लिए है।
एक दिन सब तो धरा का धरा रह जाना है।
मैं से मुक्त होना ही मोक्ष है।
शुभ संध्या मित्रों।