उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग में गोपनीय सहायक पद प्रारंभ कर वर्तमान में लखनऊ में निरीक्षक के पद पर कार्यरत मोहम्मद अली साहिल जी हृदय से शायर हैं.पुलिस विभाग में काम करना और मुख्तलिफ राहों का चयन करना इतना आसान नहीं."वर्ष २००५ में सराहनीय सेवा सम्मान" एवं" वर्ष २०१९ में उत्कृष्ट सेवा सम्मान" से इन्हीं दो बार नवाजा़ गया है."वर्ष २०१२ में *पहला कदम* एवं "वर्ष २०१४ में*किरदार*"*दो गजल संग्रह"* प्रकाशित हुए और लोकप्रिय भी हुए.
दोनों पुस्तकों को सहित्य संस्थान के द्वारा पुरस्कृत किया गया एवं *फिराक गोरखपुरी*व*अकबर इलाहाबादी*सम्मान से भी उसे नवाजा गया.
साहिलजी की तीसरी पुस्तक *तलाश साहिल की* अद्भुत है. यह गजल संग्रह अपने आप में अनूठा है. मशहूर शायर मीर तक़ी मीर की छवि इनमें दिखाई पड़ती है.
वास्तव में साहिल जी आम आदमी के शायर हैं। उन्होंने आमजनों की पीड़ा को उनकी खुशी को व *"समाजवादी विचारधारा"* को या यूँ कहें तो आमजनों के जीवन की हकीकत को अपने शेरों में स्थान दिया। उन्होंने जनता के दुखों को गहराई से अनुभव किया। वे कहते हैं....
सब ज़ख्म़ तो हरे हैं भला क्या करेंगे हम.
मरहम का जिंदगी से गिला क्या करेंगे हम.
वास्तव में साहिल जी की पंक्तियों में ग़रीबों के प्रति सहानुभूति साफ़ झलकती है। उनकी मज़बूरियों को बड़ी ही बारीकी से अपने ग़ज़ल में स्थान दिया हैं क्योंकि स्वतंत्रता के बाद कुछ
परस्थिति यथावत है यह सभी जानतें हैं उदाहरण
ज़मीं हसरत की जलती जा रही है
वह नंगे पांव चलती जा रही है.
कहीं बच्चे ना फिर सो जाएं भूखे
ये उलझन दिल में पलती जा रही है....
साहिल जी की पंक्तियां अपने शब्दों की गवाहियां दे रही हैं.जीवन के प्रत्येक क्षेत्र को उद्देश्य बनाया है.सामाजिक स्थिति,व्यवहारिक स्थिति,मानसिक स्थिति अपनी व्यथा कह रहे हैं बुजुर्गों की व्यथा को बारीकी से उकेरा है..
कैसे करें बसर वो यहां अपनी जिंदगी
रहने को जिसके कोई भी घर-बार ही नहीं..
ऐ बादशाह-ए-वक्त के बुजुर्गों के पांव में
सर भी तू अपना रख दे ये दस्तयार ही नहीं...
बुढ़ापे में व्यक्ति को भावनात्मक सहारे की होती है।और यदि उनके पास घर ना हो कैसा महसूस करती होंगे बुजुर्ग वर्ग...
17बार सम्मानित मोहम्मद अली साहिलजी ने अपने गजल संग्रह में अपने मन की बात कही है.
निकाल दे मेरी कश्ती भंवर से ए मौला
बहुत दिनों से है जारी तलाश साहिल की.
साहिलजी जैसे शायरो को इतने कम शब्दों में लिखना मेरे बस की बात नहीं.... दरअसल साहिल जी प्रासंगिक गतिविधियों के शायर हैं। उन्होंने परिस्थितियों को देखते हुए प्रासंगिक परिदृश्यों को कलम बद्ध किया है।वे हर विपरीत परिस्थिति में धैर्य के साथ आगे बढ़ने की बात करते हैं।उनका मानना है कि अगर साहस के साथ मुकाबला किया जाए,तो कोई शक्ति आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती........
बढ़ाओ हौसला औरों का खुद रहो महफूज
जो वक्त आया है उसको गुर्जर भी जाना है..
मरने भी ना देगा मुझे शायद यह मेरा गम.
मुझको मेरे बच्चों ने पलट कर नहीं देखा...........
मशहूर शायर मीर तक़ी मीर की झलक साहिल जी के गजल में मिलती है.ऐसा लगता है मीर तक़ी मीर आज भी कहीं हमारे आसपास हैं..
(डॉ अनामिका)