पहाड़ी के कोने कोने से निकली नदिया भी नीर बन कर,
सूखे पन दर्द को मलहम लगाया प्यारी सी यारी बन कर,
सजने की सवरने की चाहत का मशला जगाया उफ़- इश्क़ के दस्तूर मे आकर,
महलो मे ताजमहल दिखाया- रूह की सीरत लैला मजनू की जैसी बदली- संगिनी बनकर,
खुशियाँ मिली तेरे चहेरे को देख कर- निखरे फुल की खुशबू को देख कर,
किस्मत का पन्ना बदला ऋतु ए सावन वसंत को बदली हर ख़्वाब मे साथ रहकर,
हस्ती बदली ,बदला मुकाम मेरा, तुही- तेरा नजारा- नजर आये वो लम्हा बनाया,
दिशा ए कुदरत ने फर्माया -छु कर बुलन्दिया पुष्पक का फूल बनाया- हर आँगन मे राह देकर ।
💕 DEAR ZINDAGI